आजा तू एक बार नजरों के सामने मेरे, बित गए दिन सेकड़ो बस याद में तेरी आजा देखु मैं तेरी वो हलकट सी अदाए फिर से सवारूँ मैं रेशमी बालो को तेरी आजा एक बार फिर नजरो के सामने तू मेरे .....
न जाने क्यों । Shayari and love 1 न जाने क्यों तुम दूर हो फिर भी पास लगते हो , जब भी तुम्हे तलाशता हूँ दुनियाँ के कोने में अक्सर दिल के पास दिखते हो । न जाने क्यों तुम दूर होकर भी पास लगते हो । 【 नवनीत सूर्यवंशी 】
दोस्ती वो दोस्ती ही कैसी जो लफ्जो की राह तके , वो मोहब्बत ही कैसा जो दिल की न बात समझे, करके सितम बेशुमार खुद पर मुझे वो बहलाती है, नफरत दिखा कर मेरी वो परवाह करती है ..।
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