खुश है तू खुश हूँ मैं ये खुशियों की क्यारी है ये अत्यंत न्यारी है कोई झूमे इसमे थैया-थैया कोई झूमे पकर के बाईयां मैं तो झुमु ता थैया ता थैया ओ मेरे भैया ......
न जाने क्यों । Shayari and love 1 न जाने क्यों तुम दूर हो फिर भी पास लगते हो , जब भी तुम्हे तलाशता हूँ दुनियाँ के कोने में अक्सर दिल के पास दिखते हो । न जाने क्यों तुम दूर होकर भी पास लगते हो । 【 नवनीत सूर्यवंशी 】
दोस्ती वो दोस्ती ही कैसी जो लफ्जो की राह तके , वो मोहब्बत ही कैसा जो दिल की न बात समझे, करके सितम बेशुमार खुद पर मुझे वो बहलाती है, नफरत दिखा कर मेरी वो परवाह करती है ..।
Comments
Post a Comment